उत्कल दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कामाख्या प्रसाद षाड़ंगी ने कहा कि मातृभाषा अपनी सभ्यता संस्कृति के प्रति हमेशा मनीभाव रखना हम सभी का परम कर्तत्व है, समाज की विकास में तत्पर रहने वाले महापुरुष गोपाबंधु दास एवं उत्कल गौरव मधुसूदन दास ने अपना पूरा जीवन जनता को समर्पित कर दिया था, उत्कल सम्मेलनों जिला अध्यक्ष सुमंत मोहंती ने कहा कि
पंडित गोपाबंधु दास एवं उत्कल गौरव मधुसूदन दास के अथक प्रयास से 1903 मैं उत्कल सम्मेलनों के गठन हुआ था इसके बाद 1 अप्रैल 1936 में स्वतंत्र ओडिशा प्रदेश के गठन में पंडित गीपबधु दास एवं उत्कल गौरव मधुसूदन दास ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी
उत्कल दिवस कार्यक्रम का संचालन जिला पर्यवेक्षक सुशील षाड़ंगी ने किया, कार्यक्रम में मुख्य रूप से मुख्य अतिथि कामाख्या प्रसाद षाड़ंगी, सुमन चंद्र मोहंती, बिराजा पति, सुशील षाड़ंगी, अजय प्रधान, सपनमंडल, सुजीत हाजरा, रंजीत मंडल, जयजीत षाड़ंगी, चंद्रभानु प्रधान, सपना टोप्पो, रचिता मोहंती, कुंती मंडल, बबीता मंडल, सविता विषेई, वंदना दास, रश्मि रंजन मिश्रा, भारत चंद्र मिश्रा,कनिता दे,झुमी मिश्रा अर्चना प्रधान, सुष्मिता प्रधान, सपना नायक, शिवचरण महतो, सत्यव्रत चौहान आदि उपस्थित थे।
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