राँची : सुबह के सात बजे थे। कचहरी चौक पर चाय की दुकान के सामने खड़े रमेश महतो अपनी साइकिल संभालते हुए कह रहे थे, “बरसात में यहीं पानी भर जाता था। बच्चों को स्कूल छोड़ना मुश्किल हो जाता था।” कुछ कदम आगे एक बुजुर्ग महिला फुटपाथ तलाशती नजर आयी, तो पास ही ऑटो चालक ट्रैफिक जाम को कोसते दिखे। ये सिर्फ शिकायतें नहीं हैं, ये रांची की सड़कों की रोजमर्रा की कहानी है। अब यही कहानी बदलने की कोशिश शुरू हुई है।
सड़क सिर्फ रास्ता नहीं, रोज़मर्रा की जिंदगी है: रांची की सड़कें केवल एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का जरिया नहीं हैं। इन्हीं सड़कों पर स्कूल जाते बच्चे चलते हैं, इन्हीं पर मजदूर सुबह काम पर निकलते हैं, इन्हीं के किनारे ठेले लगते हैं और शाम को शहर की रौनक लौटती है। जब सड़क टूटी होती है, पानी भरा होता है या अतिक्रमण फैला होता है, तो उसका असर सीधे लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। इसी सच को समझते हुए नगर प्रशासन ने सड़कों को लेकर सोच बदलने का फैसला किया है।
अब हर सड़क की अपनी टीम: पहली बार रांची में ऐसा हुआ है कि किसी सड़क को “सबकी जिम्मेदारी” नहीं, बल्कि “एक टीम की जिम्मेदारी” बनाया गया है। शहर की 10 सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त सड़कों के लिए 10 अलग-अलग डेडिकेटेड रोड मैनेजमेंट टीमें बनाई गई हैं। हर सड़क के लिए एक सहायक अभियंता को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मतलब अब अगर सड़क पर गड्ढा है, नाली जाम है या फुटपाथ पर कब्जा है, तो यह साफ है कि जवाब किसे देना है।
साफ सड़क मतलब सुरक्षित सफर: रातू रोड पर रोजाना ऑटो चलाने वाले एक ऑटो चालक कहते हैं, “अचानक गड्ढा आ जाए तो ब्रेक लगाना मुश्किल हो जाता है। हादसे का डर रहता है।” नई व्यवस्था में सड़क की नियमित जांच होगी, गड्ढों की समय पर मरम्मत होगी और बारिश के बाद विशेष निरीक्षण किया जाएगा। सड़क पर बेहतर रोशनी, साफ डिवाइडर और सही रोड मार्किंग से सफर सुरक्षित बनाने की कोशिश होगी।
पैदल चलने वालों की भी सुध: अक्सर विकास की बात होती है, लेकिन पैदल चलने वालों को सबसे पहले भुला दिया जाता है। फुटपाथ पर ठेले, बाइक और अतिक्रमण आम बात है। अब फुटपाथ को समतल और बाधा-मुक्त बनाने, जेब्रा क्रॉसिंग और दिव्यांग अनुकूल रैंप देने की योजना है। डंगरा टोली की रहने वाली एक महिला कहती हैं, “अगर फुटपाथ ठीक हो जाए तो बुजुर्गों और बच्चों को सड़क पर उतरना नहीं पड़ेगा।”
जलजमाव और गंदगी से राहत की उम्मीद: बरसात के दिनों में बूटी मोड़ और कचहरी चौक के आसपास पानी भरना लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी रही है। नालियों की सफाई, मैनहोल ढक्कनों की मरम्मत और जलजमाव वाले स्थानों की पहचान कर स्थायी समाधान ढूंढने की जिम्मेदारी भी अब इसी टीम के पास होगी। साथ ही रोजाना सफाई और समय पर कचरा उठाव से सड़कों को साफ रखने का लक्ष्य है।
अतिक्रमण हटेगा, लेकिन इंसानियत के साथ: सड़क किनारे दुकान लगाने वाले कई परिवारों की रोजी-रोटी भी इन्हीं सड़कों से जुड़ी है। प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के साथ तय वेंडिंग जोन का पालन कराया जाएगा, ताकि सड़क भी खुली रहे और लोगों का रोजगार भी बना रहे।
हर सप्ताह होगी सड़क की परीक्षा: इस नई व्यवस्था में सड़कों की हालत सिर्फ कागजों में नहीं देखी जाएगी। हर सप्ताह समीक्षा होगी, फोटो और वीडियो के जरिए काम की निगरानी होगी। मतलब लापरवाही छुपाना आसान नहीं होगा।
जब शहर और नागरिक साथ चलें: प्रशासन मानता है कि सड़कें सिर्फ मशीनों और इंजीनियरों से नहीं सुधरतीं। इसके लिए नागरिकों का सहयोग भी जरूरी है। गंदगी न फैलाना, अतिक्रमण न करना और समस्याओं की जानकारी देना भी उतना ही अहम है।
Phase-1: रांची की 10 अति महत्वपूर्ण सड़कें
प्रथम चरण में शामिल प्रमुख सड़कें
कचहरी चौक से राजेन्द्र चौक तक
(अलबर्ट एक्का चौक, सरजना चौक, सुजाता चौक)
राजेन्द्र चौक से बिरसा चौक तक
(हिनू चौक)
कचहरी चौक से पिस्का मोड़ तक
(रातू रोड चौक)
रातू रोड चौक से अरगोड़ा चौक तक
(सहजानंद चौक)
रातू रोड चौक से कांके हॉस्पिटल रोड तक
कचहरी चौक से डंगरा टोली चौक तक
(लालपुर चौक)
कचहरी चौक से बूटी मोड़ तक
(रेडियम रोड, करमटोली चौक, मेडिकल चौक)
करमटोली चौक – मोरहाबादी – राजभवन – स्टेट गेस्ट हाउस –
रांची विश्वविद्यालय – प्रेस क्लब – जस्टिस एल.पी.एन. शाहदेव चौक होकर
पुनः करमटोली चौक
(मछली घर मार्ग सहित)
सरजना चौक से कांटा टोली चौक होते हुए लोवाडीह चौक तक
(मिशन चौक, डंगरा टोली चौक)
अलबर्ट एक्का चौक से लालपुर चौक होते हुए कोकर चौक तक
(प्लाजा चौक)
DRMT क्या काम करेगी?
सड़क, फुटपाथ और डिवाइडर
सड़क और फुटपाथ की नियमित जाँच
गड्ढों और टूट-फूट की समय पर मरम्मत
बारिश के बाद विशेष निरीक्षण
संपर्क सड़कों पर बाएं मोड़ की सुविधा
जल निकासी और जलजमाव
नालियों की नियमित सफाई
जलजमाव वाले स्थानों का स्थायी समाधान
मैनहोल ढक्कनों की मरम्मत
पेयजल पाइपलाइन
लीकेज की पहचान और तुरंत सुधार
सड़क कटिंग के बाद सही मरम्मत
बार-बार लीकेज वाले स्थानों का स्थायी हल
फुटपाथ और पैदल यात्री सुविधा
समतल और चौड़े फुटपाथ
दिव्यांग-अनुकूल रैंप और टैक्टाइल टाइल्स
ज़ेब्रा क्रॉसिंग और सुरक्षित क्रॉसिंग
अतिक्रमण नियंत्रण
फुटपाथ और सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाना
दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए निगरानी
नो-पार्किंग और नो-वेंडिंग ज़ोन लागू
हरियाली और सौंदर्यीकरण
सड़क और डिवाइडर पर पौधारोपण
नियमित देखभाल और सिंचाई
थीम आधारित सजावट
होर्डिंग-फ्री सड़कें
अवैध होर्डिंग और बैनर हटाना
दृश्य प्रदूषण पर नियंत्रण
तय स्थानों पर ही विज्ञापन
सार्वजनिक शौचालय
नियमित सफाई
पानी, बिजली और रोशनी की व्यवस्था
महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए सुविधा
फूड स्टॉल और ठेला
लाइसेंस और स्वच्छता की जाँच
फूड सेफ्टी मानकों का पालन
तय वेंडिंग ज़ोन में ही संचालन
दीवार पेंटिंग और शहर की पहचान
क्षतिग्रस्त दीवारों की पेंटिंग
स्वच्छता और संस्कृति पर आधारित म्यूरल
स्ट्रीट लाइट और सड़क सुरक्षा
खराब लाइट की मरम्मत
रोड मार्किंग और साइन बोर्ड
दुर्घटना संभावित स्थानों में सुधार
स्वच्छता और कचरा प्रबंधन
रोज़ाना सड़क की सफाई
दिन में कम से कम दो बार कचरा उठाव
निर्माण और बल्क कचरे पर निगरानी
डिजिटल निगरानी
सड़क-वार मासिक निरीक्षण रिपोर्ट
फोटो और वीडियो रिकॉर्ड
ड्रोन से निगरानी
नागरिकों को क्या फायदा होगा?
साफ और सुरक्षित सड़कें
बेहतर ट्रैफिक और पैदल चलने की सुविधा
शिकायतों का तेज समाधान
जलजमाव और अतिक्रमण से राहत
जवाबदेह और पारदर्शी व्यवस्था
उम्मीद की राह
रांची की सड़कें अब एक नई यात्रा पर निकल पड़ी हैं। यह यात्रा सिर्फ डामर और कंक्रीट की नहीं, बल्कि भरोसे और जिम्मेदारी की है। अगर योजना जमीन पर उतरी, तो आने वाले दिनों में हजारों लोगों की रोजमर्रा की परेशानी सचमुच कम हो सकती है। क्योंकि जब सड़कें सुधरती हैं, तब सिर्फ रास्ते नहीं बदलते, शहर की जिंदगी बदलती है।