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Saubhagya Bharat News

हम सौभाग्य भारत देश और दुनिया की महत्वपूर्ण एवं पुष्ट खबरें उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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The Saubhagya Bharat

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बुधवार, 14 जनवरी 2026

मकर संक्रांति पर एकादशी का संयोग, कब बनेगी खिचड़ी 14 या 15?

14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पावन पर्व इस बार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, कई वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है, जिससे इस दिन किये गये दान-पुण्य, स्नान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। मकर संक्रांति को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व माना जाता है। इस दिन सूर्यदेव की उपासना, पवित्र नदियों में स्नान और दान करने की परंपरा है। लेकिन इस वर्ष एकादशी का संयोग होने के कारण कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस साल षटतिला एकादशी के कारण मकर संक्रांति पर खिचड़ी का सेवन और चावल का दान वर्जित रहेगा, क्योंकि एकादशी पर चावल नहीं खाये जाते। ऐसे में खिचड़ी का दान और सेवन 15 जनवरी (द्वादशी) को करना शुभ माना गया है। हालांकि 14 जनवरी को तिल-गुड़ का सेवन और दान पूरी तरह शुभ रहेगा।



पुण्य काल व योग

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश: दोपहर 3:13 बजे

महापुण्य काल: 3:13 से 5:20 बजे

एकादशी तिथि: सूर्योदय से शाम 5:52 बजे तक

सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 7:15 से दोपहर 3:03

अमृत सिद्धि योग: सुबह 7:15 से 3:03

स्नान मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 से 5:44

इस दिन गंगा स्नान, सूर्यदेव को अर्घ्य, विष्णु पूजा और दान-पुण्य से विशेष फल की प्राप्ति मानी गई है।

राँची: दावोस में झारखंड की आवाज बनेंगी कल्पना सोरेन

राँची : विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 में झारखंड पहली बार मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष और विधायक कल्पना सोरेन दावोस और यूनाइटेड किंगडम में महिला नेतृत्व, लैंगिक समानता और समावेशी विकास पर राज्य का पक्ष रखेंगी। उनका फोकस साफ है कि जब महिलायें नेतृत्व में होती हैं, तो विकास टिकाऊ और समाज अधिक मजबूत बनता है। कल्पना सोरेन BRICS महिला सशक्तिकरण पैनल, ET महिला सशक्तिकरण संवाद, ‘वी लीड’ मंच और भारत पवेलियन समेत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झारखंड की नीतियों और उपलब्धियों को प्रस्तुत करेंगी। वे आदिवासी, ग्रामीण और वंचित समुदायों की महिलाओं की भागीदारी को राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की असली ताकत बतायेंगी। 



झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़ी 35 लाख से अधिक महिलाओं और 2.80 लाख स्वयं सहायता समूहों की कहानी भी दुनिया के सामने रखी जायेगी। हाल के वर्षों में ₹5000 करोड़ से अधिक ऋण, ‘लखपति दीदी’, ‘पलाश’, ‘जोहार’, ‘अदिवा’ जैसे कार्यक्रमों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दी है। ‘पलाश’ ब्रांड का कारोबार 2026 तक ₹45 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं ‘मंईयां सम्मान योजना’ से महिलाओं को सालाना ₹17 हजार करोड़ की सहायता मिल रही है। दावोस के बाद कल्पना सोरेन यूके में शिक्षा, कौशल विकास, जलवायु परिवर्तन और सांस्कृतिक विरासत पर बैठकों में भाग लेंगी और मरांग गोमके स्कॉलरशिप के तहत पढ़ रहे झारखंडी छात्रों से मुलाकात करेंगी। यह दौरा भारत–यूके सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

मोदी सरकार की नई योजना से 1.5 लाख का कैशलेस इलाज तुरंत

सड़क पर एक पल की चूक अब जिंदगी और मौत के बीच असहाय खड़ा नहीं करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई पहल अब सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को तुरंत इलाज और सीधी राहत देगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस योजना की जानकारी देते हुये कहा कि सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को 7 दिनों के भीतर 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। मकसद साफ है समय पर इलाज, कम मौतें।गडकरी ने कहा कि सड़क हादसों में मौत का बड़ा कारण इलाज में देरी और पैसों की चिंता होती है। अब अस्पताल ढूंढने की भागदौड़ नहीं रहेगी, पहले पैसे जमा करने की मजबूरी नहीं होगी, बिना कैश के तुरंत इलाज मिलेगा। इस योजना से हजारों जिंदगियां बचाने की उम्मीद है। 



इस योजना का पायलट 14 मार्च 2024 को चंडीगढ़ में शुरू किया गया था।अब तक के आंकड़े बताते हैं कि 5,480 लोग लाभान्वित हुये। 6,833 आवेदन प्राप्त हुये, 80% मामलों में तुरंत इलाज संभव है। ₹73.88 लाख का भुगतान हुआ। सबसे अहम बात यह योजना दोपहिया, चारपहिया, भारी वाहन, हर तरह की सड़क दुर्घटना पर लागू होगी। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से घायलों को नजदीकी अस्पताल में तुरंत भर्ती कराया जायेगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से गंभीर चोटों का खतरा घटेगा। सड़क दुर्घटना में मौतों में कमी आयेगी। गरीब और मध्यम वर्ग को आर्थिक राहत मिलेगी।

BREAKING : मिल गए लापता अंश-अंशिका, कहां से

राँची: लापता भाई-बहन अंश और अंशिका का सुराग मिल गया है। पुलिस को मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार दोनों बच्चे रामगढ़ जिले के चितरपुर इलाके में सुरक्षित पाए गए हैं। इस खबर के बाद परिजनों और पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली है।



मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची के पुलिस अधीक्षक स्वयं बच्चों को लेने के लिए रामगढ़ रवाना हो चुके हैं। पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर बच्चों की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।

पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन्हीं लोगों की भूमिका बच्चों के लापता होने के मामले से जुड़ी हुई है। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम और इसके पीछे की वजह का खुलासा किया जा सके।

बताया जा रहा है कि बच्चों की हालत ठीक है और उन्हें किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। मेडिकल जांच और काउंसलिंग के बाद दोनों को परिजनों के हवाले किया जाएगा।

इस पूरे मामले में पुलिस की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई से एक बड़ी अनहोनी टल गई। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

झारखंड: मशहूर उद्योगपति देवान गांधी का बेटा लापता, NH-33 पर लावारिस मिली कार

सराईकेला : आदित्यपुर के प्रसिद्ध उद्योगपति और आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष देवान गांधी के बेटे कैरव गांधी के अचानक लापता होने से शहर में हड़कंप मच गया है। परिवार और उद्योग जगत के लोग इस घटना से बेहद चिंतित हैं।

एनएच 33 पर सड़क किनारे मिली लावारिस कार: मंगलवार देर शाम कैरव गांधी की कार एनएच 33 पर कांदरबेड़ा के पास सड़क किनारे लावारिस हालत में मिली। कार मिलने की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और तुरंत बिष्टुपुर थाना को इसकी जानकारी दी गई।



देर रात तक नहीं लौटे थे घर: परिजनों के अनुसार कैरव गांधी मंगलवार को घर से निकले थे, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटे। जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई तो मोबाइल फोन भी बंद मिला। इसके बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई।

पुलिस ने शुरू की जांच: सूचना मिलने के बाद बिष्टुपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और कार की जांच की। पुलिस ने कार को जब्त कर लिया है और आसपास के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं से मामले की जांच कर रही है।

हाल ही में जमशेदपुर लौटे थे कैरव: कैरव गांधी ने मुंबई से एमबीए की पढ़ाई पूरी की थी। करीब छह महीने पहले ही वे जमशेदपुर लौटे थे और इसके बाद परिवार के व्यवसाय में सक्रिय रूप से काम कर रहे थे। देवान गांधी की आदित्यपुर में एम्पायर ऑटो प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी है। पूरा परिवार बिष्टुपुर के सर्किट हाउस एरिया में रहता है।

शहर में चिंता का माहौल: घटना के बाद शहर के उद्योग जगत और परिचितों में चिंता का माहौल है। परिजन कैरव गांधी की सुरक्षित वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच तेजी से चल रही है और जल्द ही कोई अहम जानकारी सामने आ सकती है।

धनबाद: आवासीय क्षेत्र में खुले बिजली तार के मकड़जाल से जल्द छुटकारा, निर्वाध बिजली के लिए आवासीय क्षेत्र में केबल आधारित तार बिछाए जा रहे है

निरसा(धनबाद): डीवीसी के मैथन स्थित आवासीय क्षेत्र में अब खुले हुए बिजली तार के मकड़ जाल से जल्द छुटकारा मिलने वाला है। इसके लिए डीवीसी प्रबंधन में पूरे आवासीय क्षेत्र में केबल आधारित बिजली तारों को लगाने का काम शुरू कर दिया है। इससे क्षेत्र में निर्वाध बिजली आपूर्ति होने का अनुमान लगाया जा रहा है ‌ इसके लिए पूरे आवासीय क्षेत्र में नए बिजली पोल गाडकर केबलिंग का काम शुरू कर दिया गया है जो अगले एक-दो महीने के अंदर ही पूरे आवासीय क्षेत्र को खुले हुए बिजली तारों से मुक्ति मिल जाएगी।



केलियासोल प्रखंड के 183 आंगनबाड़ी केंद्र अब स्कूलों में संचालित होंगे, कनिय अभियंता एवं महिला पर्यवेक्षक ने विद्यालयों का सर्वेक्षण किया

निरसा(धनबाद): जिले के निरसा , एग्यारकुंड एवं केलियासोल प्रखंड के अंतर्गत आने वाले 183 आंगनबाड़ी केंद्रों को अब नजदीक के विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा। जिससे कि बच्चों प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा सुचारू रूप से संचालित किया जा सके।



इसे लेकर प्रखंड के कनिय अभियंता शिक्षा विभाग एवं महिला पर्यवेक्षक की टीम तीनों प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों के नजदीक के विद्यालयों में स्थानांतरण के लिए सर्वेक्षण का काम शुरू कर दिया है। इसकी जानकारी देते हुए निरसा के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी यानी

सीडीपीओ: सविता कुमारी ने बताया कि निरसा, एग्यारकुंड एवं केलियसोल प्रखंड के अंतर्गत कुल 441 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं जिसमें से 183 आंगनबाड़ी केंद्र या तो किराए के भाव में चल रहे हैं या उनका अपना भवन नहीं है। इसलिए उच्च पदाधिकारी के निर्देश पर उन्हें पास के विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएंगे ।

पटना: मकर संक्रांति के अवसर पर जदयू द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री

पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज मकर संक्रांति के अवसर पर 1/20-मंत्री एन्क्लेव गर्दनीबाग, पटना में पूर्व मंत्री एवं जदयू विधायक रत्नेश सादा के आवास पर जदयू द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर रत्नेश सादा ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर उनका अभिनंदन किया।



इस अवसर पर जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, विधायक श्याम रजक, विधायक शीला कुमारी, विधायक संतोष कुमार निराला, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, विधान पार्षद कुमुद वर्मा, जदयू के राष्ट्रीय महासचिव मनीष कुमार वर्मा, पटना की महापौर सीता साहू सहित बड़ी संख्या में पार्टी के पदाधिकारीगण, कार्यकर्तागण एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

रांची की सड़कों पर शुरू हुई जिम्मेदारी की नई कहानी

राँची : सुबह के सात बजे थे। कचहरी चौक पर चाय की दुकान के सामने खड़े रमेश महतो अपनी साइकिल संभालते हुए कह रहे थे, “बरसात में यहीं पानी भर जाता था। बच्चों को स्कूल छोड़ना मुश्किल हो जाता था।” कुछ कदम आगे एक बुजुर्ग महिला फुटपाथ तलाशती नजर आयी, तो पास ही ऑटो चालक ट्रैफिक जाम को कोसते दिखे। ये सिर्फ शिकायतें नहीं हैं, ये रांची की सड़कों की रोजमर्रा की कहानी है। अब यही कहानी बदलने की कोशिश शुरू हुई है।



सड़क सिर्फ रास्ता नहीं, रोज़मर्रा की जिंदगी है: रांची की सड़कें केवल एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का जरिया नहीं हैं। इन्हीं सड़कों पर स्कूल जाते बच्चे चलते हैं, इन्हीं पर मजदूर सुबह काम पर निकलते हैं, इन्हीं के किनारे ठेले लगते हैं और शाम को शहर की रौनक लौटती है। जब सड़क टूटी होती है, पानी भरा होता है या अतिक्रमण फैला होता है, तो उसका असर सीधे लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। इसी सच को समझते हुए नगर प्रशासन ने सड़कों को लेकर सोच बदलने का फैसला किया है।

अब हर सड़क की अपनी टीम: पहली बार रांची में ऐसा हुआ है कि किसी सड़क को “सबकी जिम्मेदारी” नहीं, बल्कि “एक टीम की जिम्मेदारी” बनाया गया है। शहर की 10 सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त सड़कों के लिए 10 अलग-अलग डेडिकेटेड रोड मैनेजमेंट टीमें बनाई गई हैं। हर सड़क के लिए एक सहायक अभियंता को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मतलब अब अगर सड़क पर गड्ढा है, नाली जाम है या फुटपाथ पर कब्जा है, तो यह साफ है कि जवाब किसे देना है।

साफ सड़क मतलब सुरक्षित सफर: रातू रोड पर रोजाना ऑटो चलाने वाले एक ऑटो चालक कहते हैं, “अचानक गड्ढा आ जाए तो ब्रेक लगाना मुश्किल हो जाता है। हादसे का डर रहता है।” नई व्यवस्था में सड़क की नियमित जांच होगी, गड्ढों की समय पर मरम्मत होगी और बारिश के बाद विशेष निरीक्षण किया जाएगा। सड़क पर बेहतर रोशनी, साफ डिवाइडर और सही रोड मार्किंग से सफर सुरक्षित बनाने की कोशिश होगी।

पैदल चलने वालों की भी सुध: अक्सर विकास की बात होती है, लेकिन पैदल चलने वालों को सबसे पहले भुला दिया जाता है। फुटपाथ पर ठेले, बाइक और अतिक्रमण आम बात है। अब फुटपाथ को समतल और बाधा-मुक्त बनाने, जेब्रा क्रॉसिंग और दिव्यांग अनुकूल रैंप देने की योजना है। डंगरा टोली की रहने वाली एक महिला कहती हैं, “अगर फुटपाथ ठीक हो जाए तो बुजुर्गों और बच्चों को सड़क पर उतरना नहीं पड़ेगा।”

जलजमाव और गंदगी से राहत की उम्मीद: बरसात के दिनों में बूटी मोड़ और कचहरी चौक के आसपास पानी भरना लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी रही है। नालियों की सफाई, मैनहोल ढक्कनों की मरम्मत और जलजमाव वाले स्थानों की पहचान कर स्थायी समाधान ढूंढने की जिम्मेदारी भी अब इसी टीम के पास होगी। साथ ही रोजाना सफाई और समय पर कचरा उठाव से सड़कों को साफ रखने का लक्ष्य है।

अतिक्रमण हटेगा, लेकिन इंसानियत के साथ: सड़क किनारे दुकान लगाने वाले कई परिवारों की रोजी-रोटी भी इन्हीं सड़कों से जुड़ी है। प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के साथ तय वेंडिंग जोन का पालन कराया जाएगा, ताकि सड़क भी खुली रहे और लोगों का रोजगार भी बना रहे।

हर सप्ताह होगी सड़क की परीक्षा: इस नई व्यवस्था में सड़कों की हालत सिर्फ कागजों में नहीं देखी जाएगी। हर सप्ताह समीक्षा होगी, फोटो और वीडियो के जरिए काम की निगरानी होगी। मतलब लापरवाही छुपाना आसान नहीं होगा।

जब शहर और नागरिक साथ चलें: प्रशासन मानता है कि सड़कें सिर्फ मशीनों और इंजीनियरों से नहीं सुधरतीं। इसके लिए नागरिकों का सहयोग भी जरूरी है। गंदगी न फैलाना, अतिक्रमण न करना और समस्याओं की जानकारी देना भी उतना ही अहम है।


Phase-1: रांची की 10 अति महत्वपूर्ण सड़कें

प्रथम चरण में शामिल प्रमुख सड़कें

कचहरी चौक से राजेन्द्र चौक तक

(अलबर्ट एक्का चौक, सरजना चौक, सुजाता चौक)

राजेन्द्र चौक से बिरसा चौक तक

(हिनू चौक)

कचहरी चौक से पिस्का मोड़ तक

(रातू रोड चौक)

रातू रोड चौक से अरगोड़ा चौक तक

(सहजानंद चौक)

रातू रोड चौक से कांके हॉस्पिटल रोड तक

कचहरी चौक से डंगरा टोली चौक तक

(लालपुर चौक)

कचहरी चौक से बूटी मोड़ तक

(रेडियम रोड, करमटोली चौक, मेडिकल चौक)

करमटोली चौक – मोरहाबादी – राजभवन – स्टेट गेस्ट हाउस –

रांची विश्वविद्यालय – प्रेस क्लब – जस्टिस एल.पी.एन. शाहदेव चौक होकर

पुनः करमटोली चौक

(मछली घर मार्ग सहित)

सरजना चौक से कांटा टोली चौक होते हुए लोवाडीह चौक तक

(मिशन चौक, डंगरा टोली चौक)

अलबर्ट एक्का चौक से लालपुर चौक होते हुए कोकर चौक तक

(प्लाजा चौक)

DRMT क्या काम करेगी?

सड़क, फुटपाथ और डिवाइडर


सड़क और फुटपाथ की नियमित जाँच

गड्ढों और टूट-फूट की समय पर मरम्मत

बारिश के बाद विशेष निरीक्षण

संपर्क सड़कों पर बाएं मोड़ की सुविधा

जल निकासी और जलजमाव


नालियों की नियमित सफाई

जलजमाव वाले स्थानों का स्थायी समाधान

मैनहोल ढक्कनों की मरम्मत

पेयजल पाइपलाइन


लीकेज की पहचान और तुरंत सुधार

सड़क कटिंग के बाद सही मरम्मत

बार-बार लीकेज वाले स्थानों का स्थायी हल

फुटपाथ और पैदल यात्री सुविधा


समतल और चौड़े फुटपाथ

दिव्यांग-अनुकूल रैंप और टैक्टाइल टाइल्स

ज़ेब्रा क्रॉसिंग और सुरक्षित क्रॉसिंग

अतिक्रमण नियंत्रण


फुटपाथ और सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाना

दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए निगरानी

नो-पार्किंग और नो-वेंडिंग ज़ोन लागू

हरियाली और सौंदर्यीकरण


सड़क और डिवाइडर पर पौधारोपण

नियमित देखभाल और सिंचाई

थीम आधारित सजावट

होर्डिंग-फ्री सड़कें


अवैध होर्डिंग और बैनर हटाना

दृश्य प्रदूषण पर नियंत्रण

तय स्थानों पर ही विज्ञापन

सार्वजनिक शौचालय


नियमित सफाई

पानी, बिजली और रोशनी की व्यवस्था

महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए सुविधा

फूड स्टॉल और ठेला


लाइसेंस और स्वच्छता की जाँच

फूड सेफ्टी मानकों का पालन

तय वेंडिंग ज़ोन में ही संचालन

दीवार पेंटिंग और शहर की पहचान


क्षतिग्रस्त दीवारों की पेंटिंग

स्वच्छता और संस्कृति पर आधारित म्यूरल

स्ट्रीट लाइट और सड़क सुरक्षा


खराब लाइट की मरम्मत

रोड मार्किंग और साइन बोर्ड

दुर्घटना संभावित स्थानों में सुधार

स्वच्छता और कचरा प्रबंधन


रोज़ाना सड़क की सफाई

दिन में कम से कम दो बार कचरा उठाव

निर्माण और बल्क कचरे पर निगरानी

डिजिटल निगरानी


सड़क-वार मासिक निरीक्षण रिपोर्ट

फोटो और वीडियो रिकॉर्ड

ड्रोन से निगरानी

नागरिकों को क्या फायदा होगा?


साफ और सुरक्षित सड़कें

बेहतर ट्रैफिक और पैदल चलने की सुविधा

शिकायतों का तेज समाधान

जलजमाव और अतिक्रमण से राहत

जवाबदेह और पारदर्शी व्यवस्था

उम्मीद की राह

रांची की सड़कें अब एक नई यात्रा पर निकल पड़ी हैं। यह यात्रा सिर्फ डामर और कंक्रीट की नहीं, बल्कि भरोसे और जिम्मेदारी की है। अगर योजना जमीन पर उतरी, तो आने वाले दिनों में हजारों लोगों की रोजमर्रा की परेशानी सचमुच कम हो सकती है। क्योंकि जब सड़कें सुधरती हैं, तब सिर्फ रास्ते नहीं बदलते, शहर की जिंदगी बदलती है।

नई दिल्ली: कुत्ते के काटने पर मुआवजा अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला, राज्य सरकार देंगी हर्जाना

देशभर में लगातार बढ़ रहे आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मंगलवार (13 जनवरी 2026) को सुनवाई के दौरान बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि कुत्ते के काटने से घायल या मृत व्यक्तियों को राज्य सरकारों द्वारा मुआवजा दिया जाएगा।

जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग भी जिम्मेदार होंगे। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा — “कुत्तों को अपने घर ले जाइए, सड़कों पर छोड़ने से वे लोगों को काटते और डराते हैं।”

यह टिप्पणी उस समय आई जब वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने आवारा कुत्तों के मुद्दे को भावुकता से जोड़ा। इस पर अदालत ने कहा कि “भावुकता केवल कुत्तों के लिए ही नहीं, लोगों की सुरक्षा के लिए भी होनी चाहिए।”



गौरतलब है कि पिछले वर्ष 7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। इसके अलावा, सरकारी और सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई थी।

हाल के महीनों में देशभर में कुत्तों के हमलों से कई बच्चे और बुजुर्ग घायल या मृत हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को जन स्वास्थ्य और नागरिक सुरक्षा के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।

अब राज्य सरकारों को इस आदेश के अनुपालन के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे।

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